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Tuesday, January 7, 2014

AAP को गाली मत दो ना!

AAP को गाली मत दो ना!!!


किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिला तो धुर विरोधी दो दलों ने कुछ अभिनय किया, कुछ प्रहसन किये कुछ गालियाँ दीं और कुछ गालियाँ सुनीं। फिर गले मिले गए और दिल्ली में एक सरकार अवतरित हुई – AAP सरकार। काँग्रेस को प्रत्यक्ष सत्ता तो नहीं मिली पर सुकून बहुत मिला। उनकी चिर प्रतिद्वन्द्वी भाजपा सत्ता से दूर हो गई। और एक अन्य आशा भी काँग्रेस को मिली।
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इस बार खेला थोड़ा सा अलग है। लगता है कि इस बार काँग्रेस पुनर्जीवन की कामना नहीं कर रही है बल्कि एक छायाप्रेत को जीवित कर रही है। एक ऐसा प्रेत जो उसे छोड़कर अन्य सभी को भस्म कर देगा। काँग्रेस को लग रहा है कि यह प्रेत पितृ ऋण से ओत प्रोत होने के कारण काँग्रेस को नुकसान नहीं पहुँचायेगा जबकि अन्य जो भी उसके सामने पड़ेगा वह छायाप्रेत उसे ही लील जाएगा। काँग्रेस को शायद लग रहा है कि आज के समय में AAP की पब्लिक इमेज उसका छायाप्रेत बन सकता है। यदि उसे पाला पोसा जाए तो यह प्रेत कल सब विरोधियों को खासकर भाजपा और मोदी को लील जाएगा। काँग्रेस गणना कर चुकी लगती है। यह प्रेत वही काँग्रेसी आशा है जिसकी चर्चा इस लेख के शुरू में किया गया था।

महाभारत युद्ध में जब अर्जुन भीष्म को पराजित करने में खुद को अक्षम पा रहे थे तो उन्होंने एक अन्य यौद्धा की आड़ लेकर भीष्म पर बाणों की वर्षा की और उन्हें जमीन पर गिरा दिया। क्या काँग्रेस भी भाजपा को पराजित करने में खुद को अक्षम पाते हुए एक आड़ तैयार कर रही है ताकि आगामी चुनावी महाभारत में भाजपा पर बाण वर्षा की जा सके? इस दृष्टिकोण से तो यह एक सटीक राजनीतिक गणना लगती है।

इस गणना के परिणामस्वरूप ही संभवतः आज हर टीवी शोज़ में, राजनीतिक चर्चाओं में, निजी बातचीत में, गोष्ठियों में सभी काँग्रेसी एक ही बात कह रहे हैं – AAP को गाली मत दो ना! काँग्रेस के बड़े नेता कह रहे हैं कि सब राजनीतिक दलों को – काँग्रेस को, भाजपा को और अन्य क्षेत्रीय दलों को AAP से सीखना चाहिये। वे लोग कह रहे हैं कि यदि सब दलों ने AAP से ना सीखा तो सब दल मिट जाएँगे। वे कह रहे हैं कि सब कुछ करो पर AAP की आलोचना ना करो।

सवाल है कि -
  • काँग्रेसी नेता आजकल काँग्रेस की अपेक्षा AAP की छवि सुधारने की कोशिश में क्यों जुटे हैं?
  • वे काँग्रेस के पुनरुत्थान की अपेक्षा AAP के उत्थान के लिये अधिक चिंतित क्यों हैं?
  • क्या लोगों का यह कयास ठीक है कि AAP वस्तुतः काँग्रेस की B टीम है?
  • क्या काँग्रेस इस बार प्रत्यक्ष सत्ता ना लेकर अपने प्रोक्सीज़ के द्वारा सत्ता पाना चाहते हैं जैसा कि उन्होंने दिल्ली में किया है?
  • क्या उनके तमाम राजनीतिक प्रयास अब अखिल भारतीय कठपुतली आयोजन बनकर रह गए हैं?

इन सब प्रशनों के उत्तर यदि काँग्रेस नहीं देगी तो जनता देने को उत्सुक हो जाएगी। बेशक कुछ माह पश्चात!

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